आयुक्त महोदय का संदेश

7वां अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2021

योग एक प्राचीन पद्धति है, जो लोगों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समग्र दृष्टिकोण से कार्य करती है। योग मन और शरीर, विचार और क्रिया की एकात्मता का प्रतिनिधित्व करता है और शारीरिक व्यायाम से कहीं अधिक बढ़कर है। आसन, प्राणायाम और ध्यान के माध्यम से योग व्यक्ति के संपूर्ण मानसिक एवं शारीरिक कल्याण की ओर प्रेरित करता है।

27 सितंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र में, माननीय प्रधान मंत्री, श्री नरेंद्र मोदी ने विश्व समुदाय से योग के अंतर्राष्ट्रीय दिवस को अपनाने का आह्वान किया था। 11 दिसंबर 2014 को, 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रिकॉर्ड 177 सह-प्रायोजक देशों के साथ आम सहमति से प्रस्ताव को मंजूरी दी और 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मनाने का प्रस्ताव पारित किया। अपने प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने माना कि “योग स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करता है और विश्व समुदाय के स्वास्थ्य के लिए योगाभ्यास के फायदों के बारे में जानकारी का व्यापक प्रसार होना चाहिए”। 21 जून 2015 को, दुनिया भर में पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया।

स्वस्थ मस्तिष्क और शरीर केन्द्रीय विद्यालय संगठन शिक्षा प्रणाली का अभिन्न अंग हैं। पिछले वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने के लिए सामूहिक योगाभ्यास, योग प्रदर्शनों और कई ऐसी दिलचस्प गतिविधियों के साथ चिह्नित किया गया, जिनमें पूरे देश के विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अभिभावकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई। कोविड-19 की वजह से वर्तमान वैश्विक स्वास्थ्य आपदा को देखते हुए, इस वर्ष लोगों को अपने परिवार के साथ अपने-अपने घरों में योग करने के लिए प्रोत्साहित करना है। योग को महामारी की स्थिति में विशेष रूप से प्रासंगिक पाया गया है, क्योंकि इसके अभ्यास से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से लाभ होता है, और व्यक्ति की बीमारियों से लड़ने की क्षमता में वृद्धि होती है।

केन्द्रीय विद्यालय संगठन ने 15 जून से पूरे देश में एक सप्ताह तक चलने वाले वर्चुअल योग गतिविधि कार्यक्रम की योजना बनाई है। मैं अपने सभी विद्यार्थियों, कर्मचारियों, अभिभावकों से अपील करती हूं कि स्वस्थ तन और मन के लिए योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। आइए हम सब मिलकर सुखी, स्वस्थ और शांतिपूर्ण विश्व के निर्माण में अपना योगदान दें।

सर्वे भवन्तु सुखिनः
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु
मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत।

सभी सुखी होवें,
सभी रोगमुक्त रहें,
सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें
और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।
(निधि पांडे)
आयुक्त, के.वि.सं